गर्म हो चुकी साली नहीं मानी, जीजा को बना डाला चूत का दिवाना, पढ़ो विजय की मस्त कहानी

Edited by Super Admin, Updated: 17 Jun, 2024 22:56 PM (IST)

हैलो दोस्तों, मैं विजय कुमार। मैं आज आपको अपनी एक ऐसी सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूं जिसके बाद मैं साली के प्यार में आजतक पागल हुए फिरता हूं। उसकी चूत में लंड ना जाए तो सब अधूरा सा लगता है। मैं आपको यह हकीकत नहीं सुना पाता, लेकिन मेरे एक दोस्त ने मुझे menskamasutra.com वेबसाइट के बारे में बताया जहां मेरे जैसे जिस्म के भूखे लाैंडों द्वारा सेक्स से जुड़ी बातें साझा की जाती हैं। 

मैं हैदराबाद का रहने वाला हूं। मेरी शादी उसी लड़की के साथ 3 साल पहले हुई थी जो मेरे साथ काॅलेज में पढ़ती थी। उसका नाम दिवयांशी था। हम एक दूसरे को बेहद प्यार करते थे। कड़कती ठंड के महीने यानी कि दिसंबर में हमारी शादी हुई थी। दिवयांशी और मेरे बीच दिन में दो या तीन बार सेक्स हो जाता था। वो भी खूब दबाकर। यहां तक कि खाने की कोई फिक्र नहीं रहती थी। नई-नई शादी में चूत का प्यासा होना आप समझ ही सकते हैं...मेरे लंड का साइज भी 6 इंच तक का है। करीब आधा घंटा तक बिस्तर पर आग लगाने के लिए मैं काफी हूं। दिवयांशी मेरे से इतनी खुश थी कि उसने किसी भी चीज के लिए मना नहीं किया। लेकिन फिर एक दिन ऐसा आया कि दिवयांशी की सगी बहन, यानी कि मेरी साली की नजर भी मुझपर पड़ गई। 

साली ने यूं फंसाया जाल में

साली ने मुझे अपने जाल में ऐसा फंसाया जैसे मानो मैं सदियों पहले उसका गुलाम रह चुका होता। साली का नाम नेहा है। वो अभी 12वीं क्लास में थी। साल 2021 को अप्रैल महीने वो हमारे घर आई। नेहा अभी स्कूल जाती थी तो मेरा उसे चोदने का कभी ख्याल ही नहीं आया। हां, वो जवान हो रही थी, उसके बूब्स भी कमाल के हो रहे थे। नेहा हमारे घर आई तो दिवयांशी के साथ कई बार सोया करती थी। हो सकता हो मजाक में दिवयांशी ने मेरे लंड की तारीफें की हो। बताया हो कि तुम्हारा जीजा गन की स्पीड में शाॅट मारता है वो भी बिना रूके। दिवयांशी एक जरूरी काम से बाहर चली गई थी। उस दिन मैं घर रुका था। नेहा भी थी। मैं टीवी देख रहा था कि नेहा भी मेरे साथ आकर बैठ गई। गर्मी थी तो मैं शाॅर्ट पजामा पहनकर बैठा था। नेहा मेरे लंड की ओर देख रही थी। मैंने मजाक में पूछा कोई लड़का पसंद आया? वो तुरंत बोली- मुझे डर लगता है, आप उसे निकालो। मैं हैरान हो गया। मेरे लंड पर टीवी का रिमोट था। नेहा ने उसे उठाया, पर साथ में लंड पर भी हाथ मार दिया। मेरा खड़ा हो गया। मैं सहम रहा था पर साली गर्म हो रही थी। उसकी नजर लंड की ओर रही थी। मुझसे रूका नहीं गया। मैंने मजाक में कहा- साली आधी घरवाली होती है नेहा जी। फिर नेहा तुरंत उठी और मेरे ऊपर आ गई। उसने मेरा लंड बाहर निकाला और भारी सांसें लेते हुए लंड को दबाने लगी। मुझसे भी रहा नहीं गया। मैंने बूब्स को जोर से पकड़ते हुए उसके लाल होठों को चूसना शुरू कर दिया। 

पहले मैं डर रहा था क्योंकि उसकी उम्र 17 साल थी। पर आग निकलता नेहा का बदन मुझे चोदने पर मजबूर कर गया। नेहा को मैंने मना किया। गर्मी बहुत थी। मेरा ज्यादा मन नहीं था, पर नेहा कि आग कहां थमने वाली थी। नई जवानी में निकली आग बुझने का नाम नहीं लेती। गर्म चूत मुझे मदहोश करने लगी। मैंने नेहा की चूत पर हाथ फेरा तो वह पागल सी हो गई। नेहा ने लंड बाहर निकाला और अपनी चूत में डाल लिया। मैं उसके बूब्स चूस रहा था। मैं बैठा था, पर नेहा सप्रिंग की तरह ऊपर नीचे होती जा रही थी। करीब आधा घंटा खूब ठुकाई चलती रही। उसकी चूत पर ना कोई बाल था, पर गर्मी से हम दोनों का बुरा हाल था। नेहा का पानी निकलता, लेकिन उससे पहले दिवयांशी ने दरवाजा खटखटा दिया। हम दोनों तुरत आराम से बैठ गए, पर लंड की प्यासी नेहा की आग नहीं बुझी थी। नेहा पसीने से भीग रही थी। जब रात हुई तो नेहा उठकर मेरे कमरे में आ गई। मैं डर गया, लेकिन वो लंड से प्यास बुझाने के लिए होश खो बैठे थी। उसने आते ही दोनों टांगे उठा दीं और मुझे चोदने के लिए कहा। मेरा शांत था, लेकिन नेहा ने अचानक लंड को मुंह में लेकर खड़ा कर दिया। 

दोस्तों...क्या ही बताऊं...उसके गुलाबी होठों से मेरा लंड 20 साल लाैंडे की जवानी की तरह उबाल मारने लगा। मैंने उसकी चूत को खूब बजाया। कभी वो ऊपर तो कभी मैं। दिवयांशी में उतना मजा नहीं आया कभी जो नेहा ने मुझे दे दिया। सिर्फ एक दिन उसकी चूत ने मुझे अपना ऐसा दिवाना बनाया कि मुझे भी उसकी आदत पड़ गई। बना डाला चूत का दिवाना दोस्तों उस दिन के बाद...नेहा की जवानी ने मुझे इतना पागल कर दिया कि दिवयांशी की ओर मेरा ध्यान कम जाने लगा। दिवयांशी की चूत में लंड डालूं भी तो ख्यालों में नेहा आने लगी। फिर नेहा ने भी कई बहाने लगाकर हमारे घर आना शुरू कर दिया। नेहा में हवस इतनी भरी थी कि उसे भी अपनी बहन की तरह घंटे तक लंड पर चढ़े रहने की आदत बन गई। नेहा को जब भी माैका मिलता वो लंड पर 5जी डाटा की स्पीड की तरह चढ़ने लग पड़ती। ऊपर से जवान, उसके मस्त बूब्स किसी को भी पागल कर दे। मगर दिवयांशी का भला जिसने अपनी बातें बताकर नेहा को मेरे लंड का प्यासा कर दिया। अभी तक करीब डेढ़ साल बीत गया, नेहा की चूत को लंड की सैर करवाते हुए। मैं भी उसकी चूत का दीवाना हूं, लेकिन दिवयांशी को शक पड़ा तो लंड जो ये ऊछाल मारत है फिर कछुए की चाल की तरह चलने के लायक रह जाएगा। मैं नेहा को समझा नहीं पा रहा कि मेरे से ज्यादा चुदना कहीं समस्या ना बन जाए। वो बहाने लगाकर मेरे लंड को अपनी चूत की ओर खींच ही लेती है। तो दोस्तों अब आप मुझे बताना कि नेहा को ऐसे ही पेलता रहूं या फिर उसकी चूत की प्यास अपने किसी दोस्त के लंड से बुझाऊं?

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